इन्तज़ार
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इन्तज़ार वक्त की पाबन्द नहीं होतीं
आहटों में छुपी खामोशियाँ
बादलों में घुली बारिशें
परछाइयों में गूँजती आवाज़ की तरह
इन्तज़ार ग़ुमनाम होतीं है ।
आँखों में बसा इन्तज़ार
टूटे सपने और कभी खारे पानी सा
डूबता और यूँही उमड़ पड़ता है
मन के भीतर कुछ खिंचा सा
समन्दर की लहरों में बहता
तुम्हारे आने का इन्तज़ार होता है ।
रोज़ तारों से लड़ता चाँद सा इन्तज़ार
उम्मीद पर हर रात जागता रहता है
कभी , कहीं, किसी मोड़ पर
तुम फिर लौट आओगे और ढूँढ लोगे मुझे
नितान्त अकेले नीले आकाश में ।
तुम्हारी अमृता
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17 May 2026
रात के अकेलेपन में
घड़ी 8:50