Sunday, 17 May 2026

 


इन्तज़ार 

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इन्तज़ार वक्त की पाबन्द नहीं होतीं 

आहटों में छुपी खामोशियाँ 

बादलों में घुली बारिशें 

परछाइयों में गूँजती आवाज़ की तरह 

इन्तज़ार ग़ुमनाम होतीं है ।


आँखों में बसा इन्तज़ार 

टूटे सपने और कभी खारे पानी सा 

डूबता और यूँही उमड़ पड़ता है 

मन के भीतर कुछ खिंचा सा 

समन्दर की लहरों में बहता 

तुम्हारे आने का इन्तज़ार होता है ।


रोज़ तारों से लड़ता चाँद सा इन्तज़ार 

उम्मीद पर हर रात जागता रहता है 

कभी , कहीं, किसी मोड़ पर 

तुम फिर लौट आओगे और ढूँढ लोगे मुझे 

नितान्त अकेले नीले आकाश में ।


तुम्हारी अमृता 

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17 May 2026 

रात के अकेलेपन में 

घड़ी 8:50

Saturday, 28 March 2026

 

Image Source: https://www.unccd.int/land-and-life/sand-dust-storm/overview


बार - बार क्यों याद आता है , वो जो पीछे छूट गया? 

क्यों सारा ध्यान, सुख, शांति, आराम उसी याद के चिंतन और मनन में है? 

क्या है उसके पीछे के राज? 

जैसे - जैसे हम आगे बढ़ते जाते हैं, 

वैसे -वैसे पीछे जाने की चाहत और तीव्र हो जाती है। कुछ पुराना हिसाब चुकाना हो जैसे। 

वो जो अब यहाँ नहीं है, वो भी अभी यहीं है। उनकी चाहत, उनकी हिम्मत, उनकी नियत, उनकी ताक़त ! सब जैसे हमारे अंदर समा जाती है और हमें आवाज़ देती है, कि रुको ….

एक लंबी साँस लो, 

सब्र करो। हौसला रखो । 

यादों में अपनी पहचान बनाना एक अनोखा एहसास है। यहाँ कोई नहीं जानता कि तुम कौन हो ? क्या है तुम्हारी अहमियत? क्या है तुम्हारी औक़ात? 

यहाँ बस दूर- दूर तक एक लंबी पगडण्डी है….

चलते - चलते वो याद हमें अपनी ओर खींचती है, जैसे ठीक उसी मोड़, गली, मुहल्ले, पगडण्डी में, मैं अब भी ज़िंदा हूँ। 

धूल, हवा, आवाज़ और कभी रात का सन्नाटा हूँ । 

सब मैं हीं हूँ ….


आपकी अमृता 

29 मार्च, 2026